7 पर्वतारोहियों के शव 18,900 फीट की ऊंचाई से 17 हजार फीट की ऊंचाई पर लाए आईटीबीपी के जवान

  • आईटीबीपी के जवानों के अभियान को ऑपरेशन डेयरडेविल नाम दिया गया, बेस कैंप 3 से बेस कैंप 2 तक लाए गए शव
  • पर्वतारोहियों के एक दल ने 13 मई को नंदा देवी की चोटी की चढ़ाई शुरू की थी, 26 मई तक इन्हें वापस आना था
  • पर्वतारोहियों में 4 ब्रिटिश, 2 अमेरिकी, 1-1 ऑस्ट्रेलियाई और भारतीय शामिल थे

देहरादून. आईटीबीपी के जवान उत्तराखंड की नंदादेवी चोटी पर अब तक के सबसे कठिन अभियान को अंजाम दे रहे हैं। इस चोटी पर हिमस्खलन में मारे गए 7 पर्वतारोहियों के शवों को जवान 18900 फीट (बेस कैंप 3) की ऊंचाई से 17 हजार फीट (बेस कैंप 2) की ऊंचाई तक ले आए हैं। अब जवानों का लक्ष्य इसे बेस कैंप 1 तक लाना है। यह 15,250 फीट की ऊंचाई पर स्थित है।

पिथौरागढ़ डीएम वीके जोगडांडे ने कहा- अगर मौसम सही रहता है तो पर्वतारोहियों के शव एक से दो दिन के बीच जिला मुख्यालय तक पहुंच जाएंगे। आईटीबीपी के जवान इन शवों को ऐसी ऊंचाई तक ला रहे हैं, जहां से इन्हें जिला मुख्यालय तक एयरलिफ्ट कर लाया जा सके। ये शव करीब 21 हजार फीट की ऊंचाई पर मिले थे।

आईटीबीपी की 10 सदस्यीय टीम ने बर्फ से 8 में से 7 पर्वतारोहियों के शवों को निकाला था। लापता पर्वतारोहियों में 2 ब्रिटिश, 2 अमेरिकी और एक-एक ऑस्ट्रेलियाई और भारतीय पर्वतारोही शामिल थे।

सूचना ना मिलने पर शुरू की गई थी खोजबीन
12 सदस्यीय दल में से 8 सदस्यों ने 13 मई को नंदा देवी की चोटी की चढ़ाई शुरू की थी और इन्हें 26 मई तक वापस आना था। लेकिन, 31 मई तक जब इनकी कोई सूचना नहीं मिली तो खोजबीन शुरू की गई। 2 जून को इस दल में शामिल 4 ब्रिटिश पर्वतारोहियों को बचाया गया था। इनमें से एक मार्क थॉमस भी शामिल थे। वे रेस्क्यू टीम को हेलिकॉप्टर के जरिए उस स्थान तक ले गए थे, जहां पर्वतारोहियों ने कैंप लगाया था।

नंदा देवी में मिले पर्वतारोहियों के पार्थिव शरीरों को लाने में आईटीबीपी के पर्वतारोही जुटे हैं. इसके लिए तकनीकी पर्वतारोहण के माध्यम से दुर्लभ प्रयास किए जा रहे हैं. आईटीबीपी ने पर्वतारोहियों के शवों को नीचे लाने के लिए सोमवार को लगभग 11 घंटे लगातार मेहनत की और चार पर्वतारोहियों के पार्थिव शरीर को रास्ते के सबसे ऊंचे स्थल रिज लाइन पर 18,900 फीट की ऊंचाई तक पहुंचा दिया.

शेष तीन पर्वतारोहियों के पार्थिव शरीरों को मंगलवार को इसी स्थान पर लाने का प्रयास आईटीबीपी के माउंटेनियरिंग दल द्वारा किया जाएगा. इसके बाद तकनीकी माउंटेनियरिंग स्किल के माध्यम से इन शवों को एक-एक करके नीचे लाया जाएगा. ऐसा अनुमान है कि यदि मौसम ने साथ दिया तो मंगलवार की शाम तक सातों पार्थिव शरीर हेलीपैड बेस कैंप वन, जिसकी ऊंचाई 15,250 फीट तक है, तक पहुंचा दिए जाएंगे.

आईटीबीपी के दल द्वारा पर्वतारोहण के उच्च मानदंडों का पालन करते हुए और सभी पार्थिव शरीरों को सम्मान के साथ नीचे लाने का प्रयास किया जा रहा है. इसलिए यह ऑपरेशन तकनीकी रूप से मुश्किल और दुश्वारियों से भरा हुआ है.  जब सभी पार्थिव शरीर बेस कैंप एक तक ले आए जाएंगे तो वहां से हेलीकॉप्टर के माध्यम से इन्हें पहले मुनस्यारी और फिर पिथौरागढ़ लाया जाएगा.

बल के पर्वतारोही रतन सिंह सोनाल, द्वितीय कमान के नेतृत्व में आईटीबीपी के पर्वतारोही पिछले लगभग 15 दिनों से पर्वतारोहियों के गुम हुए दल को ढूंढने के बाद उनके पार्थिव शरीरों को नीचे लाने के प्रयास में लगातार खराब मौसम से जूझ रहे हैं. यदि कल वे सभी शवों को नीचे लाने में सफल रहते हैं तो हाल के दिनों में इस प्रकार का यह पहला अभियान होगा जो समुद्र तल से 19000 फीट से भी ऊंचे इलाके में सफल होगा

 भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) की 10 सदस्यों वाली एक टीम 18,000 फुट पर पिछले एक पखवाड़े से खराब मौसम और बर्फीले तूफान का सामना कर रही है। यह टीम वहां आठ पर्वतारोहियों के शव लाने गई है जिनकी मौत चढ़ाई के दौरान उत्तराखंड में नंदा देवी पूर्वी चोटी पर मई में हो गई थी।

हालिया जानकारी के मुताबिक एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सात बरामद शवों में से चार को पहाड़ के एक रिज तक ले आया गया है ताकि उन्हें यहां से कंधे पर 15,250 फुट पर स्थित एक आधार शिविर तक लाया जा सके और इसके बाद हेलीकॉप्टर की मदद से नीचे भेजा जा सके।

अधिकारी ने बताया कि भारत तिब्बत सीमा पुलिस के जवानों की इस टीम को इतनी ऊंचाई पर गए हुए एक पखवाड़ा हो चुका है। जवानों की यह टीम दक्ष पर्वतारोही और दूसरे कमान रैंक के अधिकारी रतन सिंह सोनल के नेतृत्व में पहाड़ पर गई है। सबसे पहले भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के हेलीकॉप्टरों ने तीन जून को यहां शवों को देखा था।

उन्होंने बताया कि सात शव बरामद कर लिए गए हैं लेकिन एक का पता अब भी नहीं चला है और टीम उसे रोजाना एक नए तरीके से खोजने का प्रयास करती रही है।

नंदा देवी में पर्वतारोहण के दौरान एवलांच की चपेट में आकर जान गंवाने वाले सात पर्वतारोहियों में से चार पर्वतारोहियों के शवों को आईटीबीपी के जवानों ने 18900 फीट की ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। इसके लिए 11 घंटे लंबा ऑपरेशन चला।

मंगलवार को शवों को 450 मीटर की खड़ी दीवार से नीचे उतारने के बाद बेस कैंप तक पहुंचा दिया जाएगा। आईटीबीपी ने इसे विश्व का पहला और तकनीकी रूप से सबसे कठिन अभियान बताया है।

इस तरह चला 11 घंटे लंबा ऑपरेशन

नंदा देवी में पर्वतारोहण के दौरान पर्वतारोहियों के शव पिंडारी की ओर गिर गए थे। इन शवों को मर्तोली की ओर लाया जा रहा है। भारत तिब्बत सीमा पुलिस के 18 हिमवीरों ने पर्वतारोही और बल के सेकेंड कमान अधिकारी आरएस सोनाल के नेतृत्व में सुबह 5 बजकर 30 मिनट पर ऑपरेशन शुरू किया। जवान बर्फ और खतरनाक दर्रो से शवों को लेकर तीन किलोमीटर चलकर 18900 फीट की ऊंचाई पर स्थित चोटी तक पहुंचे।

कुशल पर्वतारोही जवानों को एक शव को पहुंचाने में तीन घंटे का समय लगा। अपराह्न चार बजे से बर्फबारी होने के कारण ऑपरेशन रोकना पड़ा। मंगलवार की सुबह चार बजे से फिर ऑपरेशन शुरू होगा। शेष तीन शवों को इसी तरह से तीन किमी की चढ़ाई में मर्तोली की ओर लाया जाएगा। इसके बाद सभी शवों को 450 मीटर की खड़ी दीवार से नीचे उतारने के बाद 15600 फीट पर बेस कैंप तक पहुंचा दिया जाएगा, जहां से हेलीकॉप्टर से लिफ्ट कर पिथौरागढ़ लाया जाएगा।

पूरे सम्मान के साथ लाए जा रहे हैं शव

आईटीबीपी के डीआईजी एपीएस निंबाडिया डेयर डेविल अभियान पर नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने बताया कि पर्वतारोहियों के शवों को पूरे सम्मान के साथ लाया जा रहा है। डीआईजी के अनुसार एक शव का भार 80 से 90 किलो तक है। कठिन दर्रों और बर्फ में जवानों ने अभी तक इस काम को सफलतापूर्वक पूरा किया है। उन्होंने बताया कि पर्वतारोहियों के शवों को निकालने में जो तकनीक अपनाई जा रही है वह विश्व का अपनी तरह का पहला अभियान है।

यह है मामला
13 मई को मुनस्यारी से नंदादेवी ईस्ट के लिए गए ब्रिटेन निवासी मार्टिन मोरिन, जोन चार्लिस मैकलर्न, रिचर्ड प्याने, रूपर्ट वेवैल, अमेरिका के एंथोनी सुडेकम, रोनाल्ड बीमेल, आस्ट्रेलिया की महिला पर्वतारोही रूथ मैकन्स और इंडियन माउंटेनियरिंग फेडरेशन के जनसंपर्क अधिकारी चेतन पांडेय पर्वतारोहण के दौरान एवलांच की चपेट में आने से लापता हो गए थे। आईटीबीपी के द्वितीय कमान अधिकारी और एवरेस्ट विजेता रतन सिंह सोनाल के नेतृत्व में गई 18 सदस्यीय हिमवीरों की टीम ने 23 जून को सात पर्वतारोहियों के शवों को निकालकर 17800 फीट की ऊंचाई पर अस्थाई कैंप में रखा था।

भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के बचाव दल ने नंदा देवी अभियान में जान गंवाने वाले पर्वतारोहियों के शव सुरक्षित लाने के लिए जान की बाजी लगा रखी है। सोमवार को लगभग 11 घंटे की लगातार मेहनत के बाद 4 पर्वतारोहियों के पार्थिव शरीर को मार्ग के सबसे ऊंचे स्थल रिज लाइन पर 18,900 फीट की ऊंचाई तक पहुंचा दिया है। आईटीबीपी के पर्वतारोही दल के द्वारा दुर्गम पहाड़ी पर शेष बचे 3 पर्वतारोहियों के पार्थिव शरीरों को कल इसी स्थान पर लाने का प्रयास किया जाएगा। एक पर्वतारोही का अभी तक कुछ पता नहीं चल सका। इसके बाद तकनीकी माउंटेनियरिंग स्किल के माध्यम से इन पार्थिव शरीरों को एक-एक करके नीचे लाया जाएगा। आईटीबीपी के जन संपर्क अधिकारी विवेक के अनुसार यदि मौसम ने साथ दिया तो कल शाम तक सभी सातों पर्वतारोहियों के पार्थिव शरीर को हेलीपैड बेस कैंप तक पहुंचा दिया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि दो सप्ताह पूर्व नंदा देवी की दुर्गम चोटी के अभियान पर निकला यह आठ सदस्यीय दल भी प्राकृतिक आपदा का शिकार हो गया था। तभी से सात सदस्यीय इस दल की खोज की जा रही थी। जिस स्थान पर इस दल के सात सदस्यों का पता चला वह अत्यंत दुर्गम था, जहां से उनके शवों को लाने का कार्य भी बहुत जोखिम भरा था। आईटीबीपी का बचाव दल पर्वतारोहण के उच्च मानदंडों का पालन करते हुए सभी पार्थिव शरीरों को सम्मान के साथ नीचे लाने का प्रयास कर रहा है। आईटीबीपी के जन संपर्क अधिकारी ने कहा कि हमारे लिए यह अभियान तकनीकी रूप से मुश्किल और जोखिम भरा है।

आईटीबीपी का कहना है कि जब सभी पार्थिव शरीर 15 हजार फीट की ऊंचाई पर बने बेस कैंप-एक तक आ जाएंगे तब वहां से हेलीकॉप्टर के माध्यम से इन्हें पहले मुनस्यारी और फिर पिथौरागढ़ ले जाया जाएगा। आईटीबीपी के पर्वतारोही रतन सिंह सोनाल, द्वितीय कमान के नेतृत्व में आईटीबीपी के पर्वतारोही पिछले लगभग 15 दिनों से पर्वतारोहियों के गुम हुए दल को ढूंढने के बाद उनके पार्थिव शरीरों को नीचे लाने के प्रयास में लगातार खराब मौसम और धरातलीय परिस्थितियों से जूझ रहे हैं। यदि कल वे सभी शवों को नीचे लाने में सफल रहते हैं तो हाल के दिनों में इस प्रकार का यह अनूठा अभियान होगा, जिसमें समुद्र तल से 19000 फीट से भी ऊंचे इलाके से ऐसा एक सफल अभियान चलाया गया हो।

 

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